जीका वायरस की दस्तक से देश भर में दहशत, बरतें सावधानी, अपनाए ये आसान उपाय

zika virus
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नई दिल्ली। देश में जीका वायरस दस्तक दे चुका है. गुजरात के अहमदाबाद से इसके ताजा तरीन तीन मामले सामने आए हैं. इस खबर को सुन हर कोई सहम सा गया है. अभी तक यह वायरस विदेशों में ही होता था लेकिन पहली बार इसने भारत में दस्तक दी है. देश में पहली बार जीका वायरस के तीन मामले सामने आए हैं और इन तीनों ही मामलों की पुष्टि विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने भी कर दी है. सबसे खास बात यह है कि जीका वायरस के तीनों ही मामले अहमदाबाद से सामने आए हैं.

पश्चिमी देशों के बाद अब भारत में जीका की दस्तक

लैटिन अमेरिका के कई देशों को अपनी चपेट में ले चुका जीका वायरस अब धीरे-धीरे भारत में भी पांव पसारने की कोशिश में है. मच्छरों के काटने से फैलने वाला यह वायरस पैसिफिक रिजन में पहली बार साल 2007 और 2013 में फ्रेंच पॉलिनेशिया सामने आया था इसके बाद साल 2015 में अमेरिका (ब्राजील और कोलंबिया) में और ठीक इसी साल अफ्रीका के केप वर्दी में भी इसके मामले सामने आए थे. वर्तमान में अमेरिका जैसे सबसे शक्तिशाली देश होने के बावजूद जीका वायरस वहां के 22 देशों को अपना शिकार बना चुका है. अमेरिका, अफ्रिका के बाद अब जीका वायरस की पुष्टि भारत में की जा चुकि है.zika virus symptoms

क्या है जीका वायरस

जीका वायरस एक ऐसा वायरस है जो मच्छरों से फैलता है. इस पर शोध कर रहे डॉक्टर दावा कर रहे हैं कि यह एडीस मच्छरों के काटने से फैलता है. यह वही मच्छर है जिसके काटने से जिसके काटने से डेंगू, चिकनगुनिया और पीत ज्वर जैसी बीमारियां होती हैं. यह वायरस सीधे नवजात शिशु को अपना शिकार बनाता है. अगर बच्चा इस वायरस से प्रभावित हो जाए तो ताउम्र उस बच्चे की विशेष देखभाल करनी पड़ती है. इसके प्रभाव से  बच्चा शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांग हो सकता है.

हली बार जीका वायरस का केस 1940 में युगांडा से सामने आया था. इसके बाद यह विकराल रूप धारण कर महामारी की तरह अफ्रीका के कई हिस्सों में फैला गया. इसके बाद इसने दक्षिण प्रशांत और एशिया के कुछ देशों को भी अपनी चेपट में ले लिया. डॉक्टर दावा करते हैं कि 2014 के फुटबॉल विश्व कप के दौरान यह वायरस एशिया या दक्षिण प्रशांत से आया होगा. इसके बाद लैटिन अमेरिका और साल 2016 की शुरूआत में इसने ब्राजील को अपनी चपेट में लिया.

जीका वायरस के ये हैं गंभीर परिणाम

अगर छोटे बच्चा जीका वायरस से ग्रस्त हो तो बच्चे का सिर छोटा रह जाता है साथ ही दिमाग भी अविकसित रह जाता है. मेडिकल साइंस में इस बिमारी को माइक्रोसेफली कहते हैं. माइक्रोसेफली एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है जो दिमाग से जुड़ी होती है. इस गंभीर बिमारी के चलते बच्चे का सिर छोटा और दिमाग अविकसित रह जाता है.zika virus fever facts

जीका वायरस के लक्षण

जीका वायरस से ग्रसित होने पर शरीर कई तरह से बुरा प्रभाव पड़ता है. डॉक्टर्स का कहना है कि जीका वायरस से संक्रमित हर पांच में से एक ही व्यक्ति में इसके लक्षण दिखाई देते हैं. जीका वायरस से संक्रमित व्यक्ति के जोड़ों में तेज दर्द होता है. आंखें लाल हो जाती है. बैचेनी और चिड़चिड़ापन होने लगता है.

लाइलाज है यह बीमारी

सालों से चल रहे शोध के बावजूद वैज्ञानिकों को इस आत्मघाती गंभीर बीमारी से निपटने में अभी तक कोई खास सफलता हाथ नहीं लगी है. अब तक इस वायरस से निपटने के लिए न तो कोई वैक्सीन तैयार की गई है और न ही कोई दवा है. इस गंभीर बीमरी से बचने के लिए सबसे बेहतर उपाय है कि मच्छरों के काटने से बचे.what is zika virus

जीका वायरस से निपटने के उपाय

दावा किया जा रहा है कि जीका वायरस एडीज मच्छर के काटने से फैलाता है. इसलिए बेहतर होगा कि मच्छरों के काटने से बचे. घर और आस-पास सफाई रखें. मच्छरों को न पनपने दें. मच्छरदानी का उपयोग करें. बाहर निकलते समय शरीर पर क्रीम रेपलेंट का इस्तेमाल करें. शरीर को पूरी तरह ढक कर रखें.

हल्के रंग के कपड़े पहनें. अगर अपने आप में लक्षण दिखाई दें तो बिना देर किए जल्द से जल्द डॉक्टर मिले. ज्यादा से ज्यादा आराम करें. खूब सारा पानी पिए. अगर जोड़ो और शरीर में दर्द हो तो एसिटामिनोफेन जिसे आम भाषा में पीसीएम या पैरासिटामॉल लें। ध्यान दें आईब्रूफिन या इबूप्रोफेन का सेवन न करें.

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